सफ़र है कठिन आसान इसे तुम्हें स्वयं ही करना होगा इन् बाधाओं से तुम्हें अकेले ही लड़ना होगा न बनो इतने लाचार ढेरो खुशियाँ फूल बनी बिखरी हैं राहों में कुछ चुनकर इनमें से .. महका लो अपना जीवन कर लो अपने अधूरे सपने को साकार खता नहीं है कोई ,फूलों से सुगंध चुराना ... और बादल का इक टुकड़ा अपनाकर उसमें भीग जाना मृगमरीचिका नहीं हैं खुशियाँ इनको हासिल कर .. अपने जीवन के हर पल को .. जी भरकर जी लो ....... शोभा
न सागर में नमीं रही, न नदियों में घुमड़ आयें हैं ये बदरा .. कुछ नमीं लेकर मेरी अँखियों से गर,बरस गये तो सैलाब लायेंगें सब करेंगें शिकवा, मेरी अँखियों से .....शोभा
बहुत मन्नतों से मिली हो तुम मेरे आँगन की कली हो तुम
पलक झपकते ही समय बीता इतनी जल्दी तुम बड़ी हो गयी
कुछ सीख देती हूँ तुम्हे याद हमेशा तुम इसे रखना
जब भी अकेली बाहर जाना भीड़ से जरा बचकर रहना
भ्रमित बुद्धि वालों पर आवाज़ अगर उठाओगी
शर्मिंदा आप ही हो जाओगी
ठोकर तुम्हे लगे कभी सर से पहले वस्त्र सम्हालना
विदाई भी इक दिन होगी तुम्हारी पति की सेवा , बड़ो का सम्मान ... छोटों को प्यार भरपूर देना स्वयं भूखी सो जाना ... पर किसी को भूखे न सोने देना स्त्री ही तो रसोई है ये याद जरुर रखना कभी किसी की आँखों में आँसू न आने देना अपने आँसुओं को तुम स्वयं ही पोछ लेना
नहीं चाहूँगी ये कभी .. बेटी की तुम माँ बनो फिर भी अगर तुम बेटी की माँ बनना उसको भी यही सीख देना
अगर सीख मेरी याद रखोगी तुम सबकी आँखों का तारा बनोगी तुम ..... शोभा
हर पल तरसी
दर दर भटकी
पिया की एक झलक को मैं निसदिन तरसी
थकी हारी जो एक पल को ठहरी
हलचल कुछ मेरे भीतर ही हुई
पिया छुपे थे मुझमें ही
कैसे ये मैं भूल गयी
देख सन्मुख उस 'साकार' को
झर झर मेरी अँखियाँ बरसी ...:))) shobha
यूँ तो जब भी कभी थक जाती हूँ माँ गोद की चाह कर बैठती हूँ नर्म गुदगुदी गोद पाकर माँ की कुछ देर विश्राम कर लेती हूँ
जीवन पथ पर चलते -चलते .. जब बहुत ज्यादा थक जाती हूँ तब सुर्ख लाल, नर्म ,गुदगुदी , मखमली ... गोद , उज्जवल, स्वच्छ , बिछौने .. और चिर निद्रा की चाह कर बैठती हूँ ...!!! ~ ~ शोभा ~ ~