
तुम्हारे आने से ...
भ्रमों के काले बादल हट गए
नयनों से जो नीर बहे..
अंतर्मन पर पड़ी गर्त ...
धुल गयी उस नीर से
देख तेजस्वी छवि तुम्हारी
रोम-रोम मेरा पुलकित हुआ
भाव-विभोर हुआ है मन
कौन हो तुम ?
कहाँ से आए हो ?
कभी सूक्ष्म हो तुम ..
कभी विराट हो तुम ..
जो भी हो ..
बस एक तुम्ही सच हो
तुम्ही सच हो ... !!!! शोभा
वाह ! शोभा जी,
ReplyDeleteइस कविता का तो जवाब नहीं !