Monday, April 11, 2011

तुम्हारे शब्दों की जादूगरी


ये तुम्हारे शब्दों की जादूगरी थी
जिसमें मैं खो गयी  थी

मैं तो मौन थी ,
इन शब्दों के मायने भी नहीं समझती थी
कुछ नए शब्द सिखा दिए थे तुमने
तुम्हारे खूबसूरत और अनोखे शब्दों की बारिश ...
मेरे अंतर्मन को भिगोने लगी थी

तुम्हें शिकायत थी
कि
मैं कुछ बोलती नहीं
अब तुम खुश थे
तुम्हारे शब्द मैं भी बोल पड़ी थी
तुम्हारे एक -एक शब्द को मैं अपनाने लगी थी

पर शायद जो शब्द
मेरे लिए खूबसूरत और अनोखे थे ..
वो तुम्हारे लिए सिर्फ एक खेल थे

तुम्हारे ही शब्दों को मैं बार-बार ...
तुमसे कहना चाहती हूँ
अब तुम क्यूँ नहीं सुनना चाहते ?

करवट बदलते तुम्हारे शब्द ...
बहाने बनाते तुम्हारे शब्द ..
मुझसे ही नजरें चुराते तुम्हारे शब्द

अब तो तुम मौन हो
तुम्हारा मौन मुझे विचलित करने लगा है
मेरे अंतर्मन को झकझोरने लगा है तुम्हारा मौन....

शोभा

10 comments:

  1. बहुत ही खुबसुरत रचना

    रामनवमी पर्व की ढेरों बधाइयाँ एवं शुभ-कामनाएं

    ReplyDelete
  2. आदरणीया शोभा द्विवेदी मिश्रा जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    नेट भ्रमण करते हुए अचानक आपके यहां पहुंच कर हार्दिक प्रसन्नता है … आशा है , आवागमन होता रहेगा अब ।

    तुम्हारे शब्दों की जादूगरी बहुत पसंद आई

    अभी मेरी जो मनोदशा है , आपकी कविता में वर्णित है …
    करवट बदलते तुम्हारे शब्द ...
    बहाने बनाते तुम्हारे शब्द ..
    मुझसे ही नजरें चुराते तुम्हारे शब्द

    अब तो तुम मौन हो
    तुम्हारा मौन मुझे विचलित करने लगा है
    मेरे अंतर्मन को झकझोरने लगा है तुम्हारा मौन....


    … लेकिन यह मन , दोषी न होते हुए भी कई बार दोषी बना देता है … :)
    बधाई … अच्छी कविता के लिए !

    * श्रीरामनवमी की शुभकामनाएं ! *

    साथ ही…

    *नव संवत्सर की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !*

    नव संवत् का रवि नवल, दे स्नेहिल संस्पर्श !
    पल प्रतिपल हो हर्षमय, पथ पथ पर उत्कर्ष !!

    चैत्र शुक्ल शुभ प्रतिपदा, लाई शुभ संदेश !
    संवत् मंगलमय ! रहे नित नव सुख उन्मेष !!


    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    ReplyDelete
  3. आदरणीय शोभा जी
    नमस्कार !
    करवट बदलते तुम्हारे शब्द ...
    बहाने बनाते तुम्हारे शब्द ..
    मुझसे ही नजरें चुराते तुम्हारे शब्द
    ....इस बेहतरीन प्रस्‍तुति के लिये बहुत-बहुत बधाई ..।

    ReplyDelete
  4. आप सभी का तह-ए-दिल से शुक्रिया ....

    ReplyDelete
  5. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  6. ufff...करवट बदलते तुम्हारे शब्द ...
    बहाने बनाते तुम्हारे शब्द ..
    मुझसे ही नजरें चुराते तुम्हारे शब्द

    अब तो तुम मौन हो
    तुम्हारा मौन मुझे विचलित करने लगा है
    मेरे अंतर्मन को झकझोरने लगा है तुम्हारा मौन....

    ReplyDelete
  7. करवट बदलते तुम्हारे शब्द ...
    बहाने बनाते तुम्हारे शब्द ..
    मुझसे ही नजरें चुराते तुम्हारे शब्द

    वाह शोभा जी ,बहुत कुछ कह जाते आपके शब्द

    ReplyDelete
  8. Sundar w manmohak rachna SHOBHA !!BADHAI !!

    ReplyDelete
  9. शब्द अपनी सीमा से बाहर होकर बोल रहे हैं...
    शोभा जी...
    पिक अद्भुत...


    बधाई
    सस्नेह
    गीता

    ReplyDelete
  10. Vasu,Praveena ji,Saroj ji, Geeta ji,itne pyaar bhare shabdon aur sarahna ke liye aap sabhi ka tah-e-dil se shukriya ... :))

    ReplyDelete