Friday, July 8, 2011

तुम बस मेरे लिए हो

स्याह रात में
चमकते तुम सबके लिए हो
तुम्हारी चाँदनी में नहाई "मैं" धरा
जानती हूँ तुम बस मेरे लिए हो .. !!!
शोभा

5 comments:

  1. बहुत सुंदर,
    क्या बात है

    ReplyDelete
  2. सही है धरती है तो चाँद है ...

    ReplyDelete
  3. कोमल भावों से सजी ..
    ..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती

    ReplyDelete
  4.  अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

    ReplyDelete